छत पर बागवानी
कृषि क्षेत्र में संसाधनों की कमी, बढ़ती जनसंख्या, भूमि की घटती उपलब्धता और भूमि के क्षरण ने हमें इस बात पर पुनर्विचार के लिए बाध्य कर दिया है कि भविष्य की पीढ़ी के मद्देजनर हम किस प्रकार अपने संसाधनों खासकर भूमि का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करें, जिससे प्रति इकाई भूमि से सतत अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। इसके लिए कृषि के क्षेत्र में नवाचार की दिशा में अधिक ध्यान देने की जरूरत समय की मांग है।
बढ़ती जनसंख्या की कृषि के अलावा दूसरी जरूरतों की पूर्ति से जमीन की उपलब्धता, समय के साथ-साथ कम होती जा रही है, जिसका प्रभाव हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों के अतिरिक्त शहरों में भी दिखाई दे रही है। खासकर बड़े शहरों के आसपास तो खेती की जमीन कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होती जा रही है।
सामान्यत: आपने अब तक घरों में एक छोटा सा किचन गार्डन देखा होगा। आज महंगाई के कारण लोगों के लिए सब्जी और फल खरीदना जहां एक ओर मुश्किल हो गया है वहीं दूसरी और रसायन मुक्त जैविक साग-सब्जी भी नहीं मिल पा रही है। इसलिए छत में बागवानी कर परिवार को केमिकल मुक्त सब्जियां खिलाई जा सकती हैं ! आप पूरे साल भर मौसमी जैविक सब्जियों का स्वाद ले सकते हैं।
जैविक खाद और उन्नत बीजों के प्रयोग से आज बाजार में बिक रही अधिकांश सब्जियों, फलों में केमिकल का उपयोग किया जाता है। इससे बचने के सब्जी या फल की उन्नत किस्मों एवं जैविक खाद का उपयोग करती है। घर में उपयोग में लाई जाने वाली सब्जियों तथा अन्य कार्बनिक कचरे के रिसाइकिलिंग से वर्मी (केंचुए) खाद बनाकर इसका उपयोग फसल उत्पादन के लिए किया जाना चाहिए।
आइये एक प्रयास करते हैं अपने और अपनों के लिए !
मछलीघर टैंक से पानी बदलते समय उसका पानी पौधों को देने के काम आ सकता है । मछली अपशिष्ट एक अच्छ उर्वरक बनाता है।
इस प्रकार के खाद सस्ते और बनाने में आसान होते हैं और साथ ही बहुत प्रभावी भी होते हैं इनके प्रयोग से मिट्टी और फसल की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है, जिन में से कुछ निम्नलिखित हैं :
खाद, मिट्टी की संरचना में सुधार लाता है, जिसके कारण मिट्टी में हवा का प्रवाह अच्छे से संमभ्व हो पाता है , जल निकासी में सुधार होता है और साथ ही साथ पानी के कारण होने वाली मिट्टी का कटाव भी कम कर हो जाता है ।
खाद मिट्टी में पोषक तत्वों को जोड़ देता है ताकी उन्हे पौधें आसानी से सोख़ सकें और उन्हे पोषक तत्वों को लेने में आसानी हो तथा फसल की पैदावार अच्छी हो जाये।
खाद मिट्टी की जल धारण करने की क्षमता में सुधार लाता है । इस कारण सूखे के समय में भी मिट्टी मे नमी बनी रहती है।
मिट्टी में खाद मिलाने से फसल में कीट कम लगते हैं और फसल की रोगप्रतीरोधक छमता में वृद्धिहोती हैं ।
खाद, रासायनिक उर्वरकों से कई अधीक फायदेमदं हैं । रासायनिक उर्वरकों से पौधों को तो लाभ पहुँचातें हैं किन्तु इनसे मिट्टी को कोई फायदा नहीं पहुँचता है । ये आम तौर पर उसी ऋतु में पैदावार बढ़ाते है जिसमें इनका छिड़काव कियाजाता हैं । क्योंकि खाद मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करती है और मिट्टी की संरचना में सुधार लाती है , इस वज़ह से इसकेलाभकारी प्रभाव लंबे समय तक चलते है ।
- सड़ा हुआ गाये का गोबर या अन्य जानवरो का गोबर
- ग्रीन चाय - हरी चाय का एक कमजोर मिश्रण पानी में मिला कर पौधों पर हर चार सप्ताह के अन्तराल पर इस्तेमाल किया जा सकता है(एक चम्मच चाय में पानी के 2 गैलनध)।
- पंचगाव्यम्
एक मटका लें।
· उसमें गाय का दूध, दही , मक्खन, घी , मूत्र, गोबर और निविदा नारियल डाल लें ।
· लकड़ी की छड़ी की मद्द से अच्छी तरह से मिलाएं ।
· तीन दिनों के लिए मिश्रण युक्त बर्तन को बंद कर के रखें।
· तीन दिनों के बाद केले और गुड़ को उसमें डाल दें ।
· इस मिश्रण को हर रोज (21 दिनों के लिए) मिलाते रहें, और यह सुनिश्चित करें की मिश्रण को मिलाने के बाद बर्तन को अच्छे से बंद कर लें.
· 21 दिनों के बाद मिश्रण से बु उत्पन्न होने लगती है ।
· फिर पानी के 10 लीटर के मिश्रण के 200 मिलीलीटर तैयार मिश्रण मिला लें और पौधों पर स्प्रे करें।
जैविक खाद बनाने के लिए आम घरेलू खाद्य सामग्री
- जिलेटिन - जिलेटिन खाद पौधों के लिए एक महान नाइट्रोजन स्रोत हो सकता है , हालांकि ऐसा नहीं हैकी सभी पौधों नाइट्रोजन के सहारे ही पनपे। इसे बनाने के लिए गर्म पानी की 1 कप में जिलेटिन कीएक पैकेज भंग कर के मिला ले, और फिर एक महीने में एक बार इस्तेमाल के लिए ठंडे पानी के 3 कपमिला लें ।
खरपतवार नियंत्रण
जैविक खेती प्रणालियों का उद्देश्य खरपतवार का खात्मा नहीं है बल्की उसका नियंत्रण करना है ।खरपतवार नियंत्रण का मतलब फसल विकास और उपज पर मातम के प्रभाव को कम करने से है।
जैविक खेती से होने वाले लाभ-
1. मिट्टी में होने वाले लाभ -
- जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है।
- भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं।
- भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम हो जाता है।
- कृषकों को होने वाला लाभ -
- भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृध्दि हो जाती है।
- सिंचाई अंतराल में वृध्दि होती है ।
- रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो जाती है।
- फसलों की उत्पादकता में वृध्दि होती है।"
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